गायत्री प्रकाशन

देश के लेखक-पाठक समुदाय के बीच बहुत कम समय में चर्चित हो चुके गायत्री प्रकाशन का उद्देश्य साहित्य को आम जन तक ले जाना है। यह इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि जितना लिखा जा रहा है, उतना आम-जन तक नहीं पहुंच रहा है।हमारा ध्येय वाक्य है – जन तक सृजन। महज चार साल में अस्सी से अधिक कृतियां प्रकाशित करने वाले गायत्री प्रकाशन ने आने वाले दिनों में कुछ और बेहतर कृतियां समाज को अर्पित करने की ठानी है।यह सब तब ही संभव है, जब लेखक और प्रकाशक के बीच मधुर संबंध बनें।   इसे संभव बनाने में कुछ रचनाकार आगे आए हैं। गायत्री प्रकाशन एक व्यावसायिक उपक्रम होते हुए भी सहकार में विश्वास रखने वाला प्रतिष्ठान है।गायत्री प्रकाशन सिर्फ किताबों का प्रकाशन ही नहीं करता है बल्कि आम जन तक लेखक द्वारा रचे गए साहित्य को पहुंचाने के लिये भी सेतु का काम करता है। इस हेतु समय-समय पर पाठकों के साथ लेखकों के संवाद भी आयोजित करते हैं तो ‘सुनो कहानी जैसे आयोजन भी हम कर रहे हैं।अगर आप समकालीन साहित्य से रू-बरू होना चाहते हैं तो हमारे ‘जन तक सृजन अभियान से जुड़ सकते हैं।

पत्रकार-साहित्यकार श्री हरीश बी.शर्मा द्वारा स्थापित इस प्रकाशन संस्थान का ध्येय लेखक और प्रकाशक के बीच नये सिरे से सुमधुर संबंध स्थापित करने का प्रयास है। अच्छे साहित्य को अच्छे पाठक मिले। आपसी संवाद हो। बात हो और लिखने-पढ़ने का वातावरण बनाया जाए। इस दिशा में श्री हरीश बी.शर्मा द्वारा निरन्तर साहित्य वार्षिकी ‘कथारंग’ का संपादन भी किया जा रहा है। गायत्री प्रकाशन के इस कार्य की देशभर में चर्चा है।

गायत्री प्रकाशन की कृतियों पर जाने-माने विचारकों की प्रतिक्रिया